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विवि की लापरवाही से दिव्यांगों के कल्याण पर संकट

मुजफ्फरपुर। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की लापरवाही से दिव्यांगों के इलाज से जुड़े कोर्स का अध्ययन व अध्यापन ठप हो गया है। सत्र 2014 से बीएएसएलपी, बीपीपी, बीओटी व विशेष बीएड आदि स्नातक डिग्री की परीक्षाएं नहीं हो पाई हैं। इसकी वजह स्नातक व स्नातकोत्तर कोर्स का रेगुलेशन राजभवन से मंजूर नहीं होना है। इसे लेकर जेएम इंस्टीट्यूट ने राजभवन से गुहार लगाई है। तुर्की स्थित जेएम इंस्टीट्यूट में बीएएसएलपी की पढ़ाई होती है। सत्र 2014 से इसकी परीक्षा नहीं हुई है। सभी स्नातक कोर्स चार साल के हैं। इसके तहत मूक, बधिर बच्चों के बोलने व सुनने की शक्ति का अध्ययन व इलाज किया जाता है। बीपीपी के तहत दिव्यांग बच्चों के इलाज के लिए बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी का कोर्स है। बीओटी के तहत जिन लोगों के हादसे में पैर कट जाते हैं। उनके लिए कृत्रिम पैर लगाने की तकनीकी का अध्ययन होता है। मूक बधिर लोगों को शिक्षक बनाने के लिए स्पेशल बीएड कोर्स है। यह सभी महत्वपूर्ण कोर्स दिव्यांगों को समाज की मुख्य धारा में लाने से जुड़े हैं। डीडीई बीएड कोर्स भी लटका

पिछले सप्ताह ही दूरस्थ शिक्षा निदेशालय से बीएड की छात्रा/ शिक्षिका सविता मिथिला स्टूडेंट यूनियन के आमरण अनशन में शामिल थी। उसकी वजह कि डीडीई बीएड कोर्स का रेगुलेशन पास नहीं हुआ था। लिहाजा विवि परीक्षा नहीं करा पा रहा है। वह शिक्षिका हैं और मार्च 19 तक बीएड उत्तीर्ण का प्रमाणपत्र देना है। यानी रेगुलेशन की समस्या सिर्फ एक कोर्स तक सीमित नहीं है बल्कि दर्जनों कोर्स के लिए है। बीएएसएलपी समेत तमाम कोर्स के रेगुलेशन को पिछले वर्ष ही सिंडिकेट व सीनेट की बैठक में पास कर राजभवन भेजा गया था। लेकिन, कहां पेच फंसा कि दुबारा राजभवन ने इस रेगुलेशन को वापस कर दिया। इस प्रकार साल भर से मामला लटका हुआ है।

यह है स्थिति

इंस्टीट्यूट के प्राचार्य डॉ. एसएन राय ने बताया कि विवि की लापरवाही पर उन्होंने हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने विवि को निर्देश दिए कि लंबित कोर्स की शीघ्र परीक्षा कराई जाए। विवि ने दो माह का समय मांगा, जो आज तक पूरा नहीं हो पाया। इसके बाद राजभवन भी अपील कर चुके हैं। देखते हैं कि कितना समय लगता है।

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