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शहीद देशवाल के स्मारक के लिए जमीन को ‘ना’

इन दिनों देश कारगिल के शहीदों को याद कर रहा है, इसी बीच छह साल पहले झारखंड में नक्सली हमले में शहीद सीआरपीएफ के जवान सत्यप्रकाश देशवाल की याद भी टप्पल क्षेत्र के निवासियों को हो आई है। शहीद सत्यप्रकाश देशवाल के स्मारक के लिए उनके अपने ही गांव में कुछ वर्ग जमीन के लिए अपनों (ग्राम पंचायत) ने ही ‘ना’ कर दिया।

छह साल से शहीद की प्रतिमा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के आवास पर पशुओं के बंधने वाले स्थान के पास रखी है। टप्पल क्षेत्र के गांव करनपुर के मजरा कल्यानपुर निवासी सीआरपीएफ जवान सत्यप्रकाश देशवाल (25) पांच अप्रैल 2012 को झारखंड में नक्सली हमले में शहीद हुए थे। वह 2006 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे।
उनके अंतिम दर्शन के लिए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों समेत हजारों की तादाद में लोग जुटे थे। शहीद स्मारक की मांग पर तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर चौधरी ने शहीद की आठ फीट ऊंची प्रतिमा बनवा दी। उन्होंने इस प्रतिमा को कल्यानपुर में स्थापित कराने के लिए शहीद के परिजनों एवं गांव वालों से बात की। इसी बीच एक पक्ष शहीद के अंतिम संस्कार वाले स्थान पर शहीद की प्रतिमा स्थापना के विरोध में आ गया। मामला प्रशासन तक पहुंचा और मूर्ति स्थापित नहीं हो सकी।
छह साल से यह प्रतिमा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुधीर चौधरी के ताहरपुर स्थित आवास में जहां पर पशु बंधते हैं, वहां पर रखी है। चार भाइयों में सत्यप्रकाश देशवाल चार भाइयों में सबसे छोटे थे। दो भाई ओमवीर सिंह सत्यवीर सिंह परिवार समेत मथुरा में रहते हैं। एक भाई श्यामवीर सिंह गांव में रहकर खेतीबाड़ी कर रहे हैं। वह कहते हैं कि कुछ लोगों के कारण आज तक भाई की प्रतिमा गांव में स्थापित नहीं हो सकी।
मैंने देश को बेटा दिया, सरकार ने क्या दिया
शहीद की बात होते ही मां प्रेमवती देवी की आंखों में आंसू भर आए। वह फफक पड़ीं। कहने लगीं, मैने तो देश के लिए अपना बेटा दे दिया। सरकार ने क्या दिया? आज तक मेरे बेटे की बनी प्रतिमा दाह संस्कार वाले स्थान पर स्थापित नहीं हो सकी है। मेरी इच्छा है बेटे के नाम गांव में पार्क बनें। उसकी प्रतिमा पर रोज ताजे फूल चढ़ा सकूं। शहीद की पत्नी डाली ने कुछ माह बाद ही दूसरी शादी कर ली थी। परिजनों का आरोप है कि वह सरकार से मिला धन और गहने आदि अपने साथ ही ले गई।

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